August 15, 2026

देश में ‘बाहर खाने’ के बजाय ‘घर मंगाने’ का क्रेज:8.5 लाख करोड़ के फूड मार्केट में क्लाउड किचन बने मुनाफे की मशीन

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भारत में ‘बाहर खाने’ से ज्यादा अब ‘घर पर मंगाकर खाने’ का क्रेज बढ़ रहा है। रेडसीर स्ट्रैटजी कंसल्टेंट्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश का फूड सर्विसेज बाजार अभी 8.5 लाख करोड़ रुपए का है, जो 2030 तक बढ़कर करीब ₹14.3 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। इस पूरी ग्रोथ की सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब मुनाफा कमाने के लिए आलीशान रेस्टोरेंट खोलने की जरूरत नहीं रह गई है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी की रफ्तार ऑफलाइन के मुकाबले करीब ढाई गुना तेज है। क्लाउड किचन मॉडल (बिना बैठने की व्यवस्था वाला सिर्फ ऑनलाइन डिलीवरी आधारित किचन) इस समय फूड इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा ‘गेम चेंजर’ और मुनाफे की मशीन साबित हो रहा है। फूड डिलीवरी: छोटे शहरों में 3 गुना बढ़े ऑर्डर्स; क्लाउड किचन की 90% कमाई ऑनलाइन से कुल मार्केट में ऑनलाइन डिलीवरी की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2021 के 4% से बढ़कर 2026 में 11% हो गई। 2031 तक 18% होने का अनुमान है। नए क्लाउड किचन ब्रांड्स 90% रेवेन्यू ऑनलाइन चैनलों से कमाते हैं, वहीं रेस्टोरेंट 50% पर ही हैं। यह ट्रेंड छोटे शहरों तक पहुंच चुका है। 2021-26 के बीच मेट्रो शहरों में ऑर्डर्स 30 करोड़ से बढ़कर 106 करोड़ हुए, तो वहीं टियर-2, छोटे शहरों में 6 करोड़ से 3 गुना बढ़कर 18 करोड़ पहुंच गए हैं। कम लागत का खेल: रेबेल फूड्स और बेकिंगो जैसे ब्रांड्स की 3 कड़ियों वाली सीक्रेट प्लेबुक 1. शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर: महंगे शोरूम की जगह पीछे गलियों में शेयर्ड किचन खोलना, जिससे फिक्स्ड कॉस्ट घटती है। जैसे रेबेल फूड्स, बेकिंगो। 2. फोकस्ड मेन्यू: मेन्यू में 50 चीजें रखने के बजाय सिर्फ चुनिंदा आइटम रखना। इससे कच्चे माल की बर्बादी रुकती है और किचन की स्पीड बढ़ती है। जैसे द बेल्जियन वेफल। 3. प्रीमियम पोजिशनिंग: हेल्दी या प्रीमियम कैटेगरीज में खुद को ढालना, जिससे ग्राहक ऊंची कीमत देने को तैयार हो जाए। चाय, कॉफी और स्नैक्स: क्लाउड किचन के लिए 4.2 लाख करोड़ रु. के नए हॉटस्पॉट बन रहे लंच-डिनर के अलावा अब शाम के स्नैक्स और बेवरेजेज सेगमेंट में क्लाउड किचन के लिए भारी संभावनाएं हैं। स्नैक्स-डेजर्ट स्नैक्स का बाजार 1.9 लाख करोड़, डेजर्ट/बेवरेजेज का 2.3 लाख करोड़ का हो चुका है। शेक्स, जूस डिलीवरी के लिहाज से शाम के लोकप्रिय नाश्ते बन रहे हैं। कॉफी में प्रीमियमाइजेशन आउट-ऑफ-होम कॉफी मार्केट 2030 तक ~38 हजार करोड़ का होगा। इसमें मिड-सेगमेंट (₹~100-~200) की ग्रोथ सबसे तेज 35-40% सालाना है। प्रीमियम चाय भले ही चाय में 97% बाजार ₹~20 से कम वाली टपरी का हो, लेकिन ₹100 से ऊपर वाली प्रीमियम चाय का सेगमेंट 20-25% सालाना की रफ्तार से बढ़ रहा है। चैलेंज कहां है? बड़े चाय-कॉफी ब्रांड्स का ग्रॉस मार्जिन तो 62-67% है, लेकिन बड़े स्टोर साइज और ऊंचे किराए के कारण उनका मुनाफा (एबिटा) 5-9% पर सिमट जाता है। यहीं पर क्लाउड किचन मॉडल बाजी मार सकता है, अगर यही प्रीमियम चाय-कॉफी क्लाउड किचन मॉडल से बेची जाए, तो रेंट कॉस्ट घटते ही मुनाफा दोगुना हो सकता है।



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