August 14, 2026

आज से RBI MPC की 3- दिन की मीटिंग:रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम; 5 अगस्त को फैसलोें का ऐलान

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RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की तीन दिन की मीटिंग आज सोमवार 3 अगस्त से शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के स्थिर रख सकता है। महंगाई के रुख और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है। RBI की पिछली मीटिंग जून में हुई थी रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग जून में की थी। इसमें रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा था। हालांकि 2027 में महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होनी हैं, ये इस वित्त वर्ष की तीसरी मीटिंग है। पहली बैठक अप्रैल में हुई थी। RBI ब्याज दर बदलाव में जल्दबाजी नहीं करेगा विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद RBI अभी ब्याज दरों में कोई बदलाव करने की जल्दबाजी नहीं करेगा। केंद्रीय बैंक का पूरा ध्यान घरेलू महंगाई, लिक्विडिटी और आर्थिक विकास पर रहने की उम्मीद है। दिसंबर में हो सकती है बढ़ोतरी इक्विरस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड मौलिक पटेल ने भी दरों में बदलाव न होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और मौसम की मार के कारण थोक और खुदरा महंगाई में तेजी देखी जा रही है। इन दबावों के चलते पूरे साल के लिए सीपीआई (CPI) 4.9 फीसदी रहने का अनुमान है। पटेल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सख्त होती मौद्रिक नीतियों को देखते हुए RBI भविष्य के फैसलों में सावधानी बरतेगा। इक्विरस सिक्योरिटीज को उम्मीद है कि दिसंबर की पॉलिसी समीक्षा में RBI 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? रेपो रेट महंगाई से लड़ने का टूल है। जब महंगाई ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक इसे बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होने पर डिमांड घटती है और महंगाई कम हो जाती है। जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है, तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।



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