October 14, 2026
cover_1788393117083.jpg


वॉशिंगटन/बिश्केक23 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है।

हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बात कही।

SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात

अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की।

मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था।

मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पेजेश्कियन को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया।

पश्चिम एशिया के तनाव पर बातचीत

  • भारत ने कहा था कि पश्चिम एशिया के विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।
  • भारत ने शांति, स्थिरता और समुद्री रास्तों से व्यापार की स्वतंत्रता बनाए रखने पर भी जोर दिया।
  • दोनों नेताओं ने व्यावसायिक जहाजों, समुद्री मार्गों, नाविकों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी चर्चा की थी।

अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन

दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है।

इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है।

यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है।

अमेरिका बोला- अब ईरान के पास सिर्फ दो रास्ते बचे

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि हमने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है। यह ईरान और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ एक अभियान है।

ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं। पहला- पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग पड़ना और गुजारे लायक अर्थव्यवस्था। दूसरा- फिर से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका पाना।

भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध

अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के आरोप में भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने या भारत लाने में भूमिका निभाई।

इनमें पोर्टीज पार्टनर्स, सदाशिवा ओवरसीज, पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृति इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकने और उसके कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए की गई है।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है, 5 पॉइंट में समझें…

तेल: भारत ईरान से कच्चा तेल खरीदता है तो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भुगतान और खरीद मुश्किल हो सकती है।

चाबहार पोर्ट: ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत की रणनीतिक और कारोबारी रुचि है। अमेरिकी प्रतिबंधों का असर इस परियोजना पर पड़ सकता है।

डॉलर में भुगतान: अगर ईरान से जुड़े भारतीय कारोबार पर अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंध लगते हैं, तो डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है।

व्यापार: ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को अमेरिकी नियमों का पालन करना पड़ सकता है।

कूटनीतिक दबाव: अमेरिका भारत से भी ईरान के साथ आर्थिक संबंध सीमित करने को कह सकता है। हालांकि, भारत अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा जरूरतों के आधार पर फैसला करेगा।

—————————-

ये खबर भी पढ़ें…

2 दिन बाद अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल हमला, 19 की मौत, 68 घायल

अमेरिका ने 2 दिन बाद फिर ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक की। ईरान के अनुसार इन हमलों में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 68 लोग घायल हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *