August 15, 2026

दावा- BLA ने पाकिस्तान के 45 सैनिकों को मारा:बलूचिस्तान में काफिले को बनाया निशाना, बचाव में पहुंची टुकड़ी पर भी अटैक

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बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसने मस्तुंग जिले में पाकिस्तान सेना के एक काफिले पर हमला किया है। इस हमले में 45 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है, जबकि दर्जनों जवान घायल हुए हैं। यह घटना गुरुवार को क्वेटा-कराची हाइवे पर खदकुचा के पास हुई। पाकिस्तान सेना ने काफिले पर हमले की पुष्टि की है, लेकिन हताहत हुए जवानों की संख्या पर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। BLA प्रवक्ता जियांद बलूच ने बयान जारी कर बताया कि इस हमले में काफिले, सुरक्षा टीम और बाद में पहुंची सेना की टुकड़ियों को निशाना बनाया गया। BLA ने इस हमले को ‘फतेह स्क्वाड’ द्वारा अंजाम दिया गया एक सुनियोजित और जबरदस्त हमला बताया है। बचाव के लिए पहुंचे सैनिकों पर भी हमला BLA का दावा है कि हमले में सैनिकों को ले जा रही बसों के काफिले को निशाना बनाया गया। इसके अलावा काफिले की सुरक्षा में तैनात सैनिकों और बाद में मौके पर पहुंची अतिरिक्त सैन्य टुकड़ी पर भी हमला किया गया। संगठन के मुताबिक, इसके बाद इलाके में काफी देर तक मुठभेड़ चली। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक माना जाएगा। सीमित रास्तों का उठाता है BLA फायदा बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा, लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है। यहां रेगिस्तान और पहाड़ों के बीच सेना की आवाजाही के लिए गिनी-चुनी मुख्य सड़कें ही हैं। ऐसे में सैनिकों के काफिलों को बार-बार उन्हीं रास्तों से गुजरना पड़ता है। इसका फायदा उठाकर उग्रवादी पहले से उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं और ऐसे स्थान चुनते हैं, जहां घात लगाकर हमला करना आसान हो और सेना के लिए जवाबी कार्रवाई करना मुश्किल हो। बिना बख्तरबंद बसों में सफर बना कमजोरी BLA का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना कई बार सक्रिय संघर्ष वाले इलाकों में भी सैनिकों को सामान्य यात्री बसों में ले जाती है। इन बसों में बारूदी सुरंगों या भारी गोलीबारी से बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं होती। यदि काफिले पर अचानक हमला हो जाए या सड़क किनारे लगाए गए विस्फोटक में धमाका हो जाए, तो ऐसे वाहनों में बैठे सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही वजह है कि शुरुआती हमले में बड़ी संख्या में हताहत होने की आशंका बढ़ जाती है। स्थानीय खुफिया जानकारी की कमी भी बड़ी चुनौती पाकिस्तानी सेना को बलूचिस्तान में स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई वर्षों से चल रहे सैन्य अभियानों और स्थानीय लोगों की नाराजगी के कारण सेना को इलाके से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाता। दूसरी ओर, उग्रवादी संगठनों को स्थानीय स्तर पर जानकारी मिलने का फायदा मिलता है। इससे उन्हें सेना की आवाजाही, गश्त और अभियान की पहले से जानकारी मिल जाती है। 44% भूभाग, 6% आबादी; कमाई केंद्र और चीन के पास जाने से गुस्सा बलूचिस्तान पाक का 44% भूभाग है। देश की आबादी में हिस्सेदारी 6% है। तांबा, सोना, कोयला, प्राकृतिक गैस व संसाधनों के यहां बड़े भंडार हैं। इसके बावजूद आरोप है कि इससे कमाई का बड़ा हिस्सा केंद्र, सेना व चीनी कंपनियों को मिलता है। बलूच राष्ट्रवादी संगठनों का आरोप है कि इन संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि केंद्र सरकार क्षेत्र के संसाधनों का दोहन करती है, जबकि स्थानीय आबादी आज भी पीने के पानी, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रही है। इसी असंतोष को बलूच विद्रोह की एक बड़ी वजह माना जाता है। 2025 में हुए 254 विद्रोही हमलों में एक हजार की मौत बलूचिस्तान में विद्रोह अब छिटपुट नहीं, बल्कि सुरक्षा संकट बन गई है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के मुताबिक 2025 में प्रांत में 254 हमले हुए। यह 2024 की तुलना में 26% अधिक थे। इन घटनाओं में 1,026 लोग मारे गए। ​ हालांकि, BLA ने अपनी रिपोर्ट में 2025 में 521 हमलों में 1,060 सुरक्षाकर्मियों के मारने का दावा किया है। हमलों के तरीके भी बदले हैं। विद्रोही अब पुलिस चौकियों, ट्रेनों, हाईवे व सैन्य काफिलों पर बड़े और संघटित हमले कर रहे हैं। वहीं, डर हमलों के चलते आधे से ज्यादा भूभाग पर पुलिस का नियंत्रण भी नहीं रहा है।



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