August 15, 2026

कांगो में इबोला वायरस से 80 मौतें, 246 संदिग्ध केस:WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की; युगांडा-सूडान में अलर्ट, केन्या ने भी निगरानी बढ़ाई

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कांगो के पूर्वी इटुरी प्रांत में इबोला से अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। 246 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। हालांकि, WHO का कहना है कि यह महामारी की कैटेगरी में नहीं आता है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर कंबा के मुताबिक, पहला मामला एक नर्स का माना जा रहा है, जिसकी 24 अप्रैल को मौत हुई थी। जांच में अब तक इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के 8 मामलों की पुष्टि हुई है। बीमारी फिलहाल इतुरी प्रांत के बुनीया, रवामपारा और मोंगवालू इलाकों तक पहुंच चुकी है। कांगो में 1976 में पहली बार इबोला सामने आया था। यह देश में इसका 17वां मामला है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन मिला है, जबकि कांगो में पहले ज्यादातर मामले जायरे स्ट्रेन के रहे हैं। इससे चिंता बढ़ी है, क्योंकि इबोला के मौजूदा कई इलाज और टीके जायरे स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। स्थानीय लोगों में डर, कहा- रोज हो रही मौतें इतुरी प्रांत की राजधानी बुनीया में लोगों ने डर का माहौल बताया है। स्थानीय निवासी जीन मार्क असिम्वे ने कहा कि पिछले एक हफ्ते से लगातार मौतें हो रही हैं। कई बार एक ही दिन में 2-3 या उससे ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में लोगों को समझ ही नहीं आया कि बीमारी क्या है। हालांकि बुनीया में बाजार और सार्वजनिक जगहों पर सामान्य गतिविधियां जारी हैं। पड़ोसी देशों में भी खतरा बढ़ा युगांडा में कांगो से जुड़ा इबोला का एक मामला सामने आया है। संक्रमित मरीज की 14 मई को कंपाला के एक अस्पताल में मौत हो गई। बाद में शव कांगो वापस भेज दिया गया। युगांडा ने फिलहाल किसी दूसरे स्थानीय मामले की पुष्टि नहीं की है। अफ्रीका की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने युगांडा और दक्षिण सूडान में बीमारी फैलने का खतरा जताया है। केन्या ने भी क्षेत्रीय आवाजाही को देखते हुए एहतियात बढ़ा दी है। सरकार ने इबोला की तैयारी के लिए अलग टीम बनाई है और सभी एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। इबोला पहली बार 1976 में सामने आया पूरी दुनिया में इबोला वायरस डिसीज (EVD) से पीड़ित मरीजों में 25% से 90% की मौत होती है। इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले मिले थे। कांगो में जिस इलाके में यह वायरस मिला, उसके पास बहने वाली इबोला नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया। यह जानलेवा बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलती है। 2014-16 का प्रकोप सबसे घातक रहा इबोला से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में कांगो शामिल है, जहां कई बार इसके मामले सामने आ चुके हैं। 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैला इबोला इतिहास का सबसे बड़ा प्रकोप था। इस दौरान 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। बाद के वर्षों में वैक्सीन और इलाज विकसित होने से हालात संभालने में मदद मिली, लेकिन अलग-अलग स्ट्रेन सामने आने पर चुनौती बढ़ जाती है। ———— ये खबर भी पढ़ें… हंतावायरस से 3 और यात्री संक्रमित हुए:अमेरिका, फ्रांस और स्पेन के रहने वाले; टोटल केस 9 हुए, अब तक 3 की मौत हंतावायरस के संपर्क में आए 3 और लोगों में संक्रमण मिला है। इनमें एक अमेरिकी और एक फ्रांसीसी यात्री शामिल हैं, जो पहले अपने-अपने देश लौट चुके थे। वहीं, मैड्रिड में क्वारैंटाइन एक स्पेनिश नागरिक की शुरुआती रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। पूरी खबर पढ़ें…



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