August 15, 2026

आज भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला, धार में अलर्ट जारी:जुमे की नमाज के दिन 12 लेयर में बंटी सुरक्षा, 1200 पुलिसकर्मी तैनात

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धार की विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में आज मप्र हाईकोर्ट की इंदौर बेंच फैसला सुना सकती है। वर्षों पुराने इस संवेदनशील विवाद में पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई पूरी होने के बाद डबल बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसले से पहले हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और मामले की पैरवी कर रहे वकीलों ने सभी समुदायों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। इंदौर और धार में अलर्ट, पुलिस बल तैनात फैसले के मद्देनजर इंदौर और धार जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। शुक्रवार होने से संवेदनशीलता और बढ़ गई है, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा करता है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अपुष्ट जानकारी साझा नहीं करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है। भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। 12 लेयर सुरक्षा, 1200 पुलिसकर्मी तैनात धार पुलिस कंट्रोल रूम में जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया है। एसपी सचिन शर्मा ने कंट्रोल रूम पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और पुलिस बल को निर्देश दिए। एसपी ने बताया कि धार शहर की सुरक्षा 12 लेयर में की गई है। दोनों पक्षों से बातचीत कर शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है। रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को भी अलर्ट पर रखा गया है। 2022 में दायर हुई थी याचिका यह मामला 2022 में शुरू हुआ, जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने की मांग की। याचिका में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार, परिसर में नमाज पर रोक, ट्रस्ट गठन और ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने जैसी मांगें शामिल हैं। ASI ने किया था 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी। हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली। हिंदू पक्ष ने मंदिर होने के दिए तर्क हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र बताते हुए ऐतिहासिक दस्तावेज, ASI सर्वे, शिलालेख, स्थापत्य अवशेष और वसंत पंचमी पर पूजा की परंपरा का हवाला दिया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के ग्रंथ समरांगण सूत्रधार का उल्लेख करते हुए कहा कि भोजशाला की संरचना उसमें वर्णित मंदिर निर्माण मानकों से मेल खाती है। मुस्लिम पक्ष ने सर्वे रिपोर्ट पर उठाए सवाल मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने ASI सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई तस्वीरें और वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या मामले के विपरीत भोजशाला में कोई स्थापित मूर्ति मौजूद नहीं है। याचिका में ये हैं प्रमुख मांगें वर्षों से बदलती रही व्यवस्था भोजशाला को लेकर वर्षों से विवाद और प्रशासनिक व्यवस्थाएं बदलती रही हैं। 2003 से यहां हर मंगलवार और वसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा तथा शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति दी जाती है। बाकी दिनों में परिसर पर्यटकों के लिए खुला रहता है। 2013 और 2016 में वसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ने पर यहां तनाव की स्थिति भी बन चुकी है। ऐसे में आज का फैसला भोजशाला विवाद की आगे की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



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